shree Radha rani bhajan
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तेरे कारण मैं बैरागन संग मेरा मत छोड़ना
तेरे कारण मैं बैरागन,
दोहा - सावरी सूरत मोहन की,
बस गई मोरे मन,
ऐसे तड़पू मिलन को जैसे,
जल बिन तड़पे मीन।।
तेरे कारण मैं बैरागन,
संग मेरा मत छोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना,
मन मीत मेरे श्याम।।
तेरे चरणों की मै दासी,
तेरे दरस की प्रेम पियासी,
तू ही मेरा काबा काशी,
दिल से दिल को जोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना,
मन मीत मेरे श्याम।।
तू ही मेरा सांझ सबेरा,
प्रेम पुराना तेरा मेरा,
हमको तेरे बिरहा ने घेरा,
आस अब मत तोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना,
मन मीत मेरे श्याम।।
ओ मेरा मन हरने वाले,
मुझे दीवाना करने वाले,
है तो तेरे नैन निराले,
हाथ अब मत छोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना,
मन मीत मेरे श्याम।।
तेरे कारण मै बैरागन,
संग मेरा मत छोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना,
मन मीत मेरे श्याम।।
स्वर - स्वामी अशोकानंद जी महाराज।
प्रेषक - डॉ. एस. एस.सोलंकी।
9111337188
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